Thursday, November 13, 2008

ख्वाब

एक अजीब सा एहसास , कौन है वो!!
एक शान्ति , एक आनंद , हाँ मे जनता हूँ ,
कुछ लोग है , जिनकी दुआओ पर मैं जीता हूँ ,
लेकिन ये कोई और था शायद ,
कोई अनजाना , लेकिन अब उसको अनजाना कहना भी ग़लत होगा ,
फ़िर भी एक जिज्ञासा , कौन है वो अनजाना!!

कही ये मेरी खामख्याली तो नहीं ,
हाँ मैं जागते हुए ख्वाब देखता हूँ ,
कुछ ख्वाब यथार्थ मे बदल पाता हूँ ,
लेकिन आज एसा लग रहा है कि , मै ख्वाबों मे जाग रहा हूँ ,
किसी शायर ने कहा है कि , ख्वाबों मे जागते रहना बेख्वाब सोने से तो अच्छा है.

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